एम्स ऋषिकेश का मुख्य ऑडिटोरियम में आज देश के दूसरे अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने छात्रों से सीधा संवाद किया और उन्हें विज्ञान, नवाचार और चुनौतीपूर्ण करियर की राह पर आगे बढ़ने का मंत्र दिया।
“युवा ही देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं”
छात्रों को संबोधित करते हुए कैप्टन शुक्ला ने कहा कि बड़े लक्ष्य पाने के लिए पहले बड़े सपने देखने होंगे और फिर उन्हें पाने के लिए हर दिन मेहनत करनी होगी।
उन्होंने भरोसा जताया कि भारत के युवा अपनी मेहनत और जिज्ञासा से देश को वैश्विक अंतरिक्ष अनुसंधान में नई ऊँचाइयों तक पहुंचा सकते हैं।
“धरती से ISS तक का सफर”
अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने अपनी पूरी यात्रा खोलकर रख दी –
स्कूली जीवन → NDA → वायुसेना के फाइटर पायलट → टेस्ट पायलट → 2019 में गगनयान के लिए चयन → और फिर 25 जून 2025 को Axiom-4 मिशन के पायलट बनकर ISS की उड़ान।
18 दिन अंतरिक्ष में बिताकर 15 जुलाई 2025 को वह सुरक्षित लौटे।
वीडियो के जरिए उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में भारहीनता की वजह से शरीर की मांसपेशियां और हड्डियां कमजोर होती हैं और संतुलन बिगड़ जाता है। इसलिए पृथ्वी पर लौटने के बाद दोबारा फिजिकल ट्रेनिंग जरूरी हो जाती है।
*छात्रों के सवाल, कैप्टन के जवाब*
संवाद सत्र में स्कूल-कॉलेज के छात्रों ने अंतरिक्ष ट्रेनिंग, मानसिक तैयारी और मेडिकल इमरजेंसी से जुड़े सवाल पूछे। कैप्टन ने हर सवाल का जवाब धैर्य से दिया और कहा कि विज्ञान जिज्ञासा, अनुशासन और समर्पण मांगता है। कठिन से कठिन लक्ष्य भी दृढ़ संकल्प से पाया जा सकता है।
इस अवसर पर एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने उन्हें “देश का वास्तविक नायक” बताया।
उप निदेशक लेफ्टिनेंट कर्नल गोपाल मेहरा ने इंटरैक्टिव सत्र का संचालन किया। इस दौरान डीन एकेडमिक प्रो. सौरभ वार्ष्णेय, फैकल्टी, प्रशासनिक अधिकारी और मेडिकल-नर्सिंग के छात्र भी उपस्थित थे।