पीपलकोटी टनल हादसा: आपदा मंत्री का घेराव,एक करोड़ मुआवजे पर अड़े श्रमिक, सुरक्षा जांच तक काम रोकने के निर्देश।


चमोली।पब्लिक लाईव टुडे

विष्णुगाड़–पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की आरटीटी टनल में हुए दर्दनाक हादसे के बाद श्रमिकों और परियोजना प्रभावित परिवारों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया। घटनास्थल का जायजा लेने पहुंचे उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट एवं आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक का श्रमिकों और प्रभावित परिवारों ने घेराव कर मृत श्रमिकों के परिजनों को घोषित पांच लाख रुपये की सहायता को नाकाफी बताया। श्रमिकों ने दो टूक कहा कि मृतकों के परिवारों को कम से कम एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।

श्रमिकों ने कहा कि परिवार का कमाने वाला सदस्य खोने के बाद उनके सामने भविष्य और आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में पांच लाख रुपये की सहायता किसी भी लिहाज से पर्याप्त नहीं है। हादसे में स्थायी रूप से दिव्यांग हुए श्रमिकों के लिए भी कम से कम एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग उठाई गई।

श्रमिक प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री के सामने सात सूत्रीय मांगपत्र रखते हुए मृत श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा का पूरा खर्च परियोजना प्रबंधन द्वारा उठाने, घायलों को कम से कम पांच लाख रुपये आर्थिक सहायता देने और उनका समुचित नि:शुल्क उपचार कराने की मांग की। साथ ही हादसे की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कर लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार अधिकारियों और परियोजना प्रबंधन की जवाबदेही तय करने की मांग की गई।

सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, स्वतंत्र ऑडिट की मांग
श्रमिकों ने कहा कि हादसे ने परियोजना की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए परियोजना का व्यापक और स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट कराया जाए। इसके अलावा टनल में काम करने वाले सभी श्रमिकों के लिए स्पष्ट एवं बाध्यकारी सुरक्षा मानक, आपातकालीन बचाव व्यवस्था और कार्यस्थल सुरक्षा नीति लागू करने की मांग की गई।

मंत्री ने टनल में उतरकर लिया जायजा
मंत्री मदन कौशिक ने परियोजना स्थल पहुंचकर हादसे का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने परियोजना प्रबंधन के अधिकारियों से हादसे की परिस्थितियों और संभावित कारणों की जानकारी ली तथा टनल के भीतर हादसे वाले स्थान का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मंत्री ने जिलाधिकारी गौरव कुमार और पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार से राहत एवं बचाव अभियान की जानकारी भी ली।

मांगों पर गंभीरता से विचार का भरोसा
आक्रोशित श्रमिकों और प्रभावित परिवारों के बीच मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर उनकी मांगें सुनीं। उन्होंने आश्वासन दिया कि श्रमिकों की समस्याओं और सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने जिलाधिकारी चमोली को निर्देश दिए कि जब तक श्रमिकों की मांगों और सुरक्षा संबंधी आशंकाओं का समाधान नहीं होता, तब तक परियोजना प्रबंधन को काम शुरू करने की अनुमति न दी जाए।

श्रमिकों की सात प्रमुख मांगें
मृत श्रमिकों के परिवारों को कम से कम एक करोड़ रुपये मुआवजा।
स्थायी रूप से दिव्यांग श्रमिकों को भी एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता।
मृत श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा का पूरा खर्च परियोजना प्रबंधन उठाए।
घायलों को कम से कम पांच लाख रुपये सहायता और नि:शुल्क उपचार।
हादसे की स्वतंत्र जांच और दोषी अधिकारियों व प्रबंधन की जवाबदेही तय हो।
परियोजना की सुरक्षा व्यवस्था का स्वतंत्र एवं व्यापक ऑडिट कराया जाए।
सभी श्रमिकों के लिए बाध्यकारी सुरक्षा मानक और प्रभावी आपातकालीन बचाव व्यवस्था लागू हो।
टनल हादसे के बाद श्रमिकों में सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता और रोष है। अब सबकी निगाहें सरकार और परियोजना प्रबंधन पर टिकी हैं कि सात सूत्रीय मांगों पर महज आश्वासन मिलता है या मुआवजा, सुरक्षा और जवाबदेही को लेकर ठोस फैसला भी सामने आता है।

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