आंतरिक परिवर्तन से विश्व शांति। नौवें महायोग कुंभ की थीम


ऋषिकेश।पब्लिक लाईव टुडे

आंतरिकं परिवर्तन से विश्व शांति की थीम के लक्ष्य को लेकर योग एवं आध्यात्मिक नगरी

ऋषिकेश में पिरामिड स्पिरिचुअल सोसाइटीज मूवमेंट (PSSM) और पीएमसी हिंदी के संयुक्त तत्वावधान में नौवें ‘महा योग ध्यान कुंभ’ का श्री स्वामीनारायण आश्रम मुनि की रेती में भव्य शुभारंभ हुआ।

23 से 27 अक्टूबर तक आयोजित इस पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में देश के  विभिन्न राज्यों और 18 देशों से हजारों की संख्या में ध्यान साधक भाग ले रहे हैं। नौवे योग महाकुंभ  को पर्यटन मंत्रालय के इनक्रेडिबल इंडिया अभियान और आयुष मंत्रालय का सहयोग प्राप्त है।

उद्घाटन सत्र में ब्रह्मर्षि पितामह सुभाष पत्री का रिकॉर्डेड संदेश प्रसारित किया गया। उन्होंने बुद्ध, कृष्ण, ईसा मसीह और गुरु नानक की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए आत्मबोध और ध्यान के महत्व पर प्रकाश डालते कहा कि ध्यान के लिए सांसारिक जिम्मेदारियों के निर्वहन के साथ ध्यान किया जा सकता है। इसके लिए  परिवार या नौकरी छोड़ने की आवश्यकता नहीं है। स्वाध्याय, पिरामिड निर्माण और आनापानसति ध्यान के नियमित अभ्यास से व्यक्ति अपनी आध्यात्मिक यात्रा आगे बढ़ा सकता है।

पद्मश्री डी. आर. कार्तिकेयन पूर्व निदेशक CBI ने बुद्ध से एस. एन. गोयनका तक विपश्यना की परंपरा का उल्लेख किया। उन्होंने ध्यान, संगीत और पिरामिड ऊर्जा के साथ साधना पर प्रकाश डाला और ध्यान तथा पौध-आधारित आहार की भूमिका पर बल दिया।
परमार्थ निकेतन की अंतरराष्ट्रीय निदेशक साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि मां गंगा के तट पर बैठना व्यक्ति को सहज रूप से शांति और ध्यान की अनुभूति करा सकता है। ध्यान का अर्थ केवल आंखें बंद करके बैठना नहीं, बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षण में सजगता और जागरूकता बनाए रखना है।

स्वामी सुनील भगत ने  बताया कि वर्ष 2013-14 में ब्रह्मर्षि सुभाष पत्री के ऋषिकेश आगमन के बाद 2017 में दिवंगत डॉ. एल. एन. शास्त्री के साथ इस आयोजन की शुरुआत हुई।
आचार्य गंगाराम ने ‘ध्यानं निर्विषयं मनः’ के सिद्धांत को समझाते हुए मन को बाहरी विषयों से हटाकर अंतर्मुखी बनाने पर जोर दिया।
स्वर्णमाला पत्री के सान्निध्य में हजारों साधकों ने सामूहिक आनापानसति ध्यान का अभ्यास किया। साधकों ने आंखें बंद करके स्वाभाविक श्वास के आने-जाने पर ध्यान केंद्रित किया।
पी. वी. रामराजू ने ध्यान की विभिन्न अवस्थाओं के बारे में बताया। उन्होंने ध्यान, स्वाध्याय, सत्संग और ध्यान के प्रसार को आध्यात्मिक प्रगति के महत्वपूर्ण चरण बताते हुए प्रतीकात्मक उदाहरण दिया – ध्यान की गति 60, ध्यान + अध्ययन की 160, सत्संग की 300 और ध्यान के प्रसार की 500 किमी प्रति घंटे।

पहले दिन दूसरे सत्र में ध्यान विज्ञान, व्यावहारिक साधना और अनुभव साझा करने के कार्यक्रम हुए। जिसमें बच्चों के लिए सामाजिक-भावनात्मक विकास, एकाग्रता और ध्यान पर कार्यशाला। 12 से 25-30 वर्ष के युवाओं के लिए ध्यान को दैनिक जीवन में अपनाने, पढ़ाई में एकाग्रता और मानसिक संतुलन पर कार्यक्रम।

महा योग ध्यान कुंभ के दौरान 23 से 27 अक्टूबर तक 108 घंटे का अखंड ध्यान संचालित किया जा रहा है। इसके लिए छह-छह घंटे की पालियों में चौबीसों घंटे ध्यान साधना की व्यवस्था है। आश्रम परिसर में ‘ऊर्जा मेला’ भी लगाया गया है, जहां आध्यात्मिक पुस्तकों, ध्यान साहित्य और पिरामिड से संबंधित उपकरणों की प्रदर्शनी है। गंगा रिसॉर्ट स्थित जीएमवीएन परिसर में पंजीकृत साधकों के लिए अन्नप्रसाद की व्यवस्था भी की गई है।
पांच दिवसीय आयोजन का उद्देश्य ध्यान को जनसामान्य तक पहुंचाना, बच्चों-युवाओं में मानसिक सजगता विकसित करना तथा आंतरिक परिवर्तन के माध्यम से समाज में शांति, करुणा और सद्भाव को प्रोत्साहित करना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

पब्लिक लाइव टुडे में आपका स्वागत है हमारे चैनल में खबर और विज्ञापन देने के लिए संपर्क करे-9997778161