

- लोक परीक्षा संशोधन विधेयक लोकसभा से पास
- नकल माफिया पर कसेगा शिकंजा
- कानून बनने के लिए राज्यसभा की मंजूरी और राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलना अभी बाकी
नई दिल्ली ।पब्लिक लाईव टुडे
प्रतियोगी और सरकारी भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक तथा संगठित परीक्षा धांधली पर नकेल कसने के उद्देश्य से लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 बुधवार को लोकसभा में पारित हो गया। विधेयक में नकल माफिया, पेपर लीक गिरोह और परीक्षा में धांधली करने वालों के खिलाफ पहले से कहीं अधिक सख्त दंड का प्रावधान किया गया है। अब संगठित पेपर लीक में दोषी पाए जाने पर 10 वर्ष तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकेगा। साथ ही अपराध से अर्जित संपत्ति भी जब्त की जाएगी।
विधेयक में मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन, दो माह के भीतर जांच पूरी करने और आरोपपत्र दाखिल होने के तीन माह के भीतर सुनवाई पूरी करने का लक्ष्य तय किया गया है। आवश्यकता पड़ने पर केंद्र सरकार विशेष जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) भी गठित कर सकेगी। हालांकि यह विधेयक अभी राज्यसभा से पारित होना शेष है।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान
- संगठित पेपर लीक पर 10 वर्ष तक की सजा।
- दोषियों पर अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना।
- अपराध से अर्जित संपत्ति जब्त की जाएगी।
- विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई।
- दो माह में जांच और तीन माह में मामले के निस्तारण का लक्ष्य।
- केंद्र सरकार जरूरत पड़ने पर एसटीएफ गठित कर सकेगी।
- विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति का प्रावधान।
जुर्माने और सजा में बड़े बदलाव
- अनुचित साधनों का उपयोग:
- सजा: 5 से बढ़ाकर 10 वर्ष तक।
- जुर्माना: 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये तक।
- सेवा प्रदाता (Service Provider):
- जुर्माना: 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये तक।
- सजा: न्यूनतम 5 वर्ष, अधिकतम 10 वर्ष।
- संगठित पेपर लीक गिरोह:
- सजा: 7 से 10 वर्ष तक।
- जुर्माना: 10 करोड़ रुपये तक।

